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मदनलाल ढींगरा :
मदनलाल ढींगरा :
परिचय :
मदनलाल ढिंगड़ा भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अंतम क्रान्तिकारी थे। भारतीय स्वतंत्रता की चिंगारी को अग्नि में महान श्रेयकार शहीद मदन लाल ढींगरा को ही जाना जाता है। फिर भी मदन लाल ढींगरा के परिवार में राष्ट्रभक्ति की कोई ऐसी परंपरा नहीं थी वह खुद से ही देश भक्ति के रंग में रंगे थे। वे इंग्लैण्ड में अध्ययन कर रहे थे जहाँ वे विलियम हट कर्ज़ वायली नामक एक ब्रिटिश अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी। कर्जन वायली की हत्या के आरोप में उन पर 22 जुलाई, 1999 को आरोप लगाया गया। मदन लाल ढींगरा कोर्ट ने खुले शब्दों में कहा कि "मुझे गर्व है कि मैं अपना जीवन समर्पित कर रहा हूं।" यह घटना बीसवीं शताब्दी में भारतीय स्वतन्त्रता आंदोलन की कुछेक घटनाओं में से एक है।
मदनलाल ढींगरा :
जीवनिक जीवन :
मदनलाल धींगड़ा का जन्म 18 सितंबर 1883 को पंजाब प्रान्त के एक सम्पन्न हिन्दू परिवार में हुआ था। उनके पिता दित्तामल जी सिविल सर्जन थे और अंग्रेजी रंग में पूरी तरह रंगे हुए थे किन्तु माताजी अत्यन्त धार्मिक एवं भारतीय संस्कारों से परिपूर्ण महिला थीं। उनका परिवार अंग्रेजों का विश्वासपात्र था और जब मदनलाल को भारतीय स्वतन्त्रता सम्बन्धी क्रान्ति के आरोप में लाहौर के एक कालेज से निकाल दिया गया तो परिवार ने मदनलाल से नाता तोड़ लिया। मदनलाल को जीवन यापन के लिये पहले एक क्लर्क के रूप में, फिर एक तांगा-चालक के रूप में और अन्त में एक कारखाने में श्रमिक के रूप में काम करना पड़ा। कारखाने में श्रमिकों की दशा सुधारने हेतु उन्होने यूनियन (संघ) बनाने की कोशिश की किन्तु वहाँ से भी उन्हें निकाल दिया गया। कुछ दिन उन्होंने मुम्बई में काम किया फिर अपनी बड़े भाई की सलाह पर सन् 1906 में उच्च शिक्षा प्राप्त करने इंग्लैण्ड चले गये जहाँ उन्होंने यूनिवर्सिटी कालेज लन्दन में यांत्रिकी अभियांत्रिकी में प्रवेश ले लिया। विदेश में रहकर अध्ययन करने के लिये उन्हें उनके बड़े भाई ने तो सहायता दी ही, इंग्लैण्ड में रह रहे कुछ राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं से भी आर्थिक मदद मिली थी।
मदनलाल ढींगरा :
महत्वपूर्ण तथ्य : :
उनके पिता का नाम दित्तामल जी सिविल सर्जन थे और अंग्रेजी रंग में पूरी तरह रंगे हुए थे।
सन 1906 में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले इंग्लैण्ड गए जहाँ उन्होंने विश्वविद्यालय कालेज लन्दन में यांत्रिकी अभियांत्रिकी में प्रवेश लिया।
जुलाई 1909 में मदनलाल ने एक समारोह में ऋण वायली को गोली मार दी जिससे कुछ दिनों बाद उनकी मृत्यु हो गई थी।
किसी भारतीय द्वारा ब्रिटेन में की गई यह पहली राजनितिक हत्या मदनलाल की थी।
अदालत ने 23 जुलाई 1909 को फांसी की सजा सुनाई थी।
17 अगस्त 1909 को 22 साल का यह देशभक्त फाँसी पर लटका दिया गया था।
ये स्मारक में अजमेर रेलवे स्टेशन के ठीक सामने है।
इनहोने नार दिया था कि- 'देश की पूजा ही राम की पूजा है'।
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